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इफको ने देशव्यापी एकीकृत नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत की


इफको ने देशव्यापी एकीकृत नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत की


Posted By: Ameeta  |  Posted Date: 02-10-2025

   इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड), भारत की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्था, ने 10 अप्रैल 2026 को औपचारिक रूप से इफको नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान का शुभारंभ किया। यह एक व्यापक एकीकृत राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को अपनाने को प्रोत्साहित करना है। यह कार्यक्रम इफको सदन, नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इसका उद्घाटन इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने किया। इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने भी इस अवसर पर अपनी गरिमामय उपस्थिति से कार्यक्रम को सुशोभित किया।

   यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की प्रेरणा से आरंभ हुआ है और 'आत्मनिर्भर भारत' तथा 'सहकार से समृद्धि' के राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप है। इस पहल को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा जी का भी विशिष्ट समर्थन प्राप्त है।

   भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में नैनो एनपीके लिक्विड (8-8-10) और नैनो एनपीके ग्रेन्युलर (20-10-10) की ऐतिहासिक अधिसूचना को भारत की कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया। उन्होंने आगे कहा कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोवेंशन्स में इफको का इनोवेशन हब और ब्राजील में आगामी नैनो उर्वरक विनिर्माण संयंत्र, जो जून 2026 तक चालू होने के लिए तैयार है, कृषि के लिए नैनोतकनीक में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रमाण हैं।

   इस अवसर पर इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि भारत आज उस ऐतिहासिक संगम पर खड़ा है जहां परंपरा और तकनीक मिलती हैं। यही संगम भारतीय कृषि को एक नई दिशा दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की समृद्धि गांवों और किसानों से प्रवाहित होनी चाहिए और 'आत्मनिर्भर भारत' तभी साकार हो सकता है जब किसान सशक्त और समृद्ध हो। उन्होंने कहा कि 'सहकार से समृद्धि' का मंत्र, जिसके तहत सहकारी संस्थाएं किसानों तक नई तकनीक और संसाधन पहुंचाने का माध्यम बन रही हैं, इस अभियान की भावना को पूर्णतः प्रतिबिंबित करता है और सही मायने में 'आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि' के सार को समाहित करता है।

   संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिए एक परिवर्तनकारी क्षण बताया। उन्होंने स्मरण दिलाया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को भारत के कृषि क्षेत्र के लिए एक 'गेम-चेंजर' और प्राकृतिक खेती की ओर एक मार्ग के रूप में समर्थन दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नैनो यूरिया प्लस की एक 500 मिली की बोतल पारंपरिक यूरिया की तुलना में कहीं बेहतर पोषक तत्व दक्षता प्रदान करती है, साथ ही मृदा स्वास्थ्य क्षरण, जल प्रदूषण और भारत की उर्वरक आयात निर्भरता की गंभीर चुनौतियों को भी संबोधित करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नैनो उर्वरक कोई अस्थायी उपाय नहीं हैं — ये एक स्थायी, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध समाधान हैं, जो कम लागत, अधिक उत्पादकता, स्वस्थ मिट्टी और सार्थक पर्यावरण संरक्षण प्रदान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये उत्पाद सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत करेंगे, जिसमें पैक्स और सहकारी नेटवर्क उनके वितरण और किसान शिक्षा में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

   अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि नैनो महा अभियान को एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता और व्यवहार-परिवर्तन अभियान के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसके चार स्पष्ट उद्देश्य हैं: नैनो यूरिया प्लस, नैनो डीएपी, नैनो एनपीके, नैनो जिंक और नैनो कॉपर का बड़े पैमाने पर प्रचार, किसानों को मुख्यतः फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही प्रयोग का प्रशिक्षण, पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना और सहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करना। उन्होंने माना कि कई किसान अभी भी नैनो उर्वरकों के सही उपयोग से अनजान हैं और भ्रम एवं हिचकिचाहट बनी हुई है। उन्होंने कहा, "हमें इसे गांव-स्तर की जागरूकता अभियानों, हर पैक्स को मजबूत करने और क्षेत्र प्रदर्शनियों के माध्यम से दूर करना होगा। जब किसान परिणाम अपनी आंखों से देखेगा, तो विश्वास अपने आप आएगा।"

   अपने संबोधन के समापन में संघाणी ने नैनो महा अभियान को एक सच्चे जन आंदोलन में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने पुष्टि की कि नैनो उर्वरक महज एक उत्पाद नहीं हैं, ये भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग हैं, हमारी मिट्टी और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प हैं और किसान आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी साधन हैं। उन्होंने कहा, "आइए सामूहिक रूप से संकल्प लें: कम लागत, ज़्यादा उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण — हर खेत में नैनो फर्टिलाइजर। यही नया भारत है। यही आत्मनिर्भर भारत है।"

   इफको ने 218 लाख से अधिक बोतलें नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतलें नैनो डीएपी लिक्विड की बिक्री हासिल की। इफको के नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों ने भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री दर्ज की। उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, और नैनो डीएपी की 57.89 लाख बोतलें डीएपी के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जो देश के लिए रसद, ऊर्जा और आयात लागत में भारी बचत को दर्शाती हैं।  

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