भारत का उर्वरक भंडार खरीफ (ग्रीष्म) फसल के मौसम से पहले अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। सरकार ने शुक्रवार को किसानों और बाजारों को आश्वस्त करने की कोशिश की कि पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे भूराजनीतिक तनाव से घरेलू आपूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
उर्वरक विभाग ने एक बयान में कहा कि शुक्रवार तक कुल उर्वरक भंडार 177.31 लाख टन था, जो एक साल पहले के 129.85 लाख टन से 36.5 प्रतिशत अधिक है। विभाग ने कहा, ‘‘किसान सरकार की प्राथमिकता हैं और उनके हितों से किसी भी हालत में समझौता नहीं किया जाएगा।’’
किसानों से आग्रह किया गया है कि वे बिना घबराए खरीफ की तैयारी में जुट जाएं। धान जैसी ख़रीफ़ फ़सलों की बुवाई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है। सबसे अधिक खपत वाला उर्वरक और प्राकृतिक गैस फीडस्टॉक पर अत्यधिक निर्भर यूरिया का स्टॉक 59.30 लाख टन था। डायमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का भंडार 25.13 लाख टन था, जबकि एनपीकेएस उर्वरक भंडार 55.87 लाख टन तक पहुंच गया। सरकार ने कहा कि उसने फरवरी, 2026 तक 98 लाख टन तैयार उर्वरकों का आयात किया है। अगले तीन महीनों में डिलिवरी के लिए 17 लाख टन की निर्यात खेप पहले से ही कतार में हैं। बयान में कहा गया है कि भारतीय कंपनियों ने क्षेत्रीय मूल्य निर्धारण और आपूर्ति में अस्थिरता से बचाव के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश (पी एंड के) उर्वरकों के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उत्पादकों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते भी हासिल किए हैं।