कृष्णा बिज़नेस डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड (KBD Business) एक अग्रणी भारतीय कंपनी है, जो कृषि और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में जाना-माना नाम है। इसके उत्पाद और बिज़नेस मॉडल किसानों और आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं।
केबीडी बिजनेस कृषि इनपुट्स (खेती के उपयोग वाले उत्पादों) के साथ-साथ हेल्थ और आयुर्वेदिक की श्रेणी में आज तेज़ी से अपनी पहचान मजबूत कर रही है। कंपनी का उद्देश्य किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सहायता देना है और साथ ही नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए उत्पाद उपलब्ध कराना है। कंपनी भारत के 28 राज्यों और कई केंद्रशासित प्रदेशों में 2 लाख 62 हजार 397 से अधिक सक्रिय प्रतिनिधियों के माध्यम से फैली हुई है, जो मिशन “एक लाख से एक करोड़” को जल्द पूरा करने की दिशा में कार्यरत हैं।
केबीडी बिजनेस की पहचान गुणवत्ता, स्थिरता और परिणाम-आधारित उत्पादों के लिए की जाती है जो पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। कंपनी न केवल किसानों को तकनीकी और उत्पाद समर्थन देती है, बल्कि ऑनलाइन ट्रेनिंग, व्यवसाय विकास योजनाएं और नये प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराती है। इसके प्रतिनिधि किसान और व्यवसायी दोनों के लिए अवसर पैदा करते हैं। कंपनी के डेवलपमेंट डायरेक्टर नरेश पिशोरीलाल सबलोक, जिन्होंने अपनी कुशलता और सूझबूझ के साथ कंपनी को एक मुकाम पर पहुंचाया है, इनका कहना है कि मैंने वर्ष 1981 में जबलपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। उसके पश्चात विभिन्न राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट संगठनों में कार्य करते हुए प्रबंधन, नेतृत्व और रणनीतिक निर्णयों का गहन अनुभव अर्जित किया। अपने करियर के अंतिम चरण में मैं एक प्रतिष्ठित जर्मन बहुराष्ट्रीय कंपनी में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत रहा। मेरी पत्नी एक शिक्षाविद रही हैं और उन्होंने पुणे के एक प्रसिद्ध विद्यालय में 27 वर्षों तक प्राचार्य के रूप में सेवाएं दीं।
कॉर्पोरेट जीवन के दौरान मुझे एमवे जैसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग संगठन से जुड़ने का अवसर मिला, जहां मैंने व्यावसायिक विकास की बारीकियां सीखीं। प्रशिक्षण हेतु ऑस्ट्रेलिया जाने का अवसर मिला और वहीं से मेरे करियर को नई गति मिली। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मुझे “गोल्ड बर्ड” सम्मान से नवाज़ा गया। आगे चलकर मैं नेटवर्क 21 जैसी ट्रेनिंग संस्था में प्रशिक्षक के रूप में भी कार्य करने लगा। समय के साथ मैंने स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ किया, जिसे आज मेरा पुत्र सफलतापूर्वक संचालित कर रहा है। सेल्स और मार्केटिंग मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके थे। स्वदेशी आंदोलन की भावना से प्रेरित होकर मैंने एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया जिसमें पूरे भारत में लगभग डेढ़ लाख लोग जुड़े हुए थे।
कुछ वर्षों के बाद मैं पुनः एक संगठन से जुड़ा, जहां उच्च पद पर रहते हुए कार्य किया। किंतु 2014 में मैंने अचानक उस कंपनी से अलग होने का निर्णय लिया। यह निर्णय उद्योग जगत में चर्चा का विषय बन गया। इसी दौरान कृष्णा बिज़नेस डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के तत्कालीन एमडी अमरजीत चौरसिया ने मुझसे संपर्क किया और भारत को ऑर्गेनिक बनाने के मिशन में सहभागी बनने का आग्रह किया। प्रारंभ में मैंने तुरंत कोई उत्तर नहीं दिया, किंतु रसायनों से होने वाले भूमि और स्वास्थ्य नुकसान से मैं पहले से ही चिंतित था। अंततः मैंने निर्णय लिया कि भारत के किसानों को समृद्ध बनाने और देश को प्राकृतिक खेती की ओर ले जाने के इस अभियान में पूर्ण रूप से जुड़ूंगा। यह मेरे जीवन का एक बिल्कुल नया मोड़ था। न मैं किसान परिवार से था, न ही कभी खेती से जुड़ा रहा था। फिर भी मेरा एक ही लक्ष्य था —भारत का किसान दुनिया का सबसे समृद्ध किसान बने और भारत का नागरिक स्वस्थ जीवन जिये।
अमरजीत चौरसिया के वर्षों के शोध और उनके लेखों ने मुझे कृषि विज्ञान की गहरी समझ दी। “हमारा अनुसंधान” जैसे लेख मेरे लिए मार्गदर्शक बने और इन्हीं के माध्यम से मैं पूरे देश में ऑर्गेनिक खेती का संदेश पहुंचा सका। कंपनी का आधुनिक कॉल सेंटर, बहुभाषी प्रशिक्षित सेल्स एग्जीक्यूटिव और सुव्यवस्थित बिज़नेस सिस्टम इस सफलता के मजबूत स्तंभ बने। यहां प्रतिनिधियों को सीधे सफल बिज़नेस मॉडल पर काम करने का अवसर मिलता है, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होती है।
कृषि विशेषज्ञों द्वारा तत्काल मार्गदर्शन की सुविधा किसानों के लिए वरदान सिद्ध हुई है। फसल की समस्या का फोटो भेजकर तुरंत समाधान मिलना यह व्यवस्था कंपनी को विशेष बनाती है। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण रहा है विश्वास मल्टीप्लायर तकनीक की प्रभावशीलता पर मेरा अटूट विश्वास ही किसानों और बिज़नेस पार्टनर्स को इससे जोड़ता गया। मराठी में कहा जाता है “शोधा म्हणजे सापडेल” खोजो और समाधान मिलेगा। मैंने वही किया और आज करोड़ों किसान ऑर्गेनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। इसी कार्य के लिए मुझे “ऑर्गेनिक भारत के शिल्पकार” सम्मान से सम्मानित किया गया। नेटवर्क मार्केटिंग के 23 वर्षों के अनुभव के बाद मैं कह सकता हूं कि जहां पारदर्शिता होती है, वहीं स्थायी सफलता मिलती है। केबीडी में हर आय का विवरण पैनल पर स्पष्ट दिखाई देता है और समय पर भुगतान होता है बिना किसी देरी के, यहां तक कि लॉकडाउन जैसे कठिन समय में भी कंपनी प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण, आवास, भोजन और विकास में पूरा सहयोग करती रही है, जो आज के समय में दुर्लभ उदाहरण है।
आज मेरे हजारों बिज़नेस पार्टनर आत्मनिर्भर बन चुके हैं और मैं स्वयं आर्थिक स्वतंत्रता का जीवन जी रहा हूं। केबीडी से जुड़ना मेरे जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट सिद्ध हुआ। नए युग के साथ कंपनी ने तकनीकी नवाचारों को अपनाया है। युवा नेतृत्व में बिज़नेस को और सरल, तेज़ और पारदर्शी बनाया गया है। एक लाख प्रतिनिधियों से आगे बढ़ते हुए अब लक्ष्य है - एक करोड़ सशक्त उद्यमी। मेरा मानना है सफलता की कुंजी तीन बातों पर निर्भर है समय, पैसा और लोग। जब ये तीनों संतुलित होते हैं, तो सफलता अवश्य मिलती है।