हाल के एक दशक में भारत ही नहीं पूरी दुनिया में हर्बल और नेचुरल चिकित्सा का उभार देखने को मिला है। तुलसी, हल्दी, आंवला जैसी जड़ी-बूटियों की खूब मांग बढ़ी है। लेकिन अब बात इससे भी आगे जा रही है। अब हाइब्रिड वेलनेस का ट्रेंड इन दिनों चल रहा है। ये ट्रेंड केवल हर्बल उत्पादांे तक सीमित नहीं है बल्कि आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के मेल से तैयार की गई एक स्वास्थ्य सोच है, जो लोगों की बदलती जरूरतों के मुताबिक तेजी से विकसित हो रही है।
हाइब्रिड वेलनेस
हाइब्रिड वेलनेस का मतलब होता है पारंपरिक (हर्बल/आयुर्वेदिक) ज्ञान तथा आधुनिक विज्ञान और तकनीक का संयोजन। हाइब्रिड वेलनेस दरअसल केवल जड़ी-बूटियों से की जाने वाली चिकित्सा नहीं है बल्कि इसमें उनके कई सक्रिय तत्वों और विभिन्न हर्बल उत्पादों की सही मात्रा व उनके प्रमाणित प्रभाव को एक साथ इस्तेमाल किया जाता है। आधुनिक तरीके से आजकल इनके कैप्सूल, सीरम, ड्रिंक और सप्लीमेंट मौजूद हैं। जैसे हल्दी के इस्तेमाल को अब सीधे हल्दी की जगह इसके तत्व कुर्कुमिन को बायो एवलेबल कैप्सूल में दिया जाता है, जो सीधे से कई गुना ज्यादा प्रभावी होता है। इसी तरह तनाव कम करने वाले क्लीनिकल सप्लीमंेट के रूप मंे अश्वगंधा को इस्तेमाल मंे लाते हैं। स्किन केयर में ऐलोवेरा के साथ अब लैब टेस्टेड एक्टिव्स मिलाए जाते हैं। इस तरह हम कह सकते हैं कि दादी-नानी के नुस्खों को वैज्ञानिक भरोसे का नया रूप मिल गया है। इसे ही हाइब्रिड वेलनेस कहते हैं।
ये हर्बल से अलग है
हर्बल वेलनेस जहां मुख्यतः प्राकृतिक होने पर जोर देता है, वहीं हाइब्रिड वेलनेस प्राकृतिक के साथ प्रमाणित तत्वों के साथ इस्तेमाल होता है। लेकिन यह सुरक्षित है और निश्चित रूप से असरदार भी। क्योंकि कई बार प्राकृतिक जड़ी-बूटियां सुरक्षित होती हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि उनका प्रभाव भी हो। क्योंकि कई बार इनका प्रभाव सक्रिय नहीं होता, इसलिए हाइब्रिड चिकित्सा मंे इनके प्रभावों को वैज्ञानिक तरीके से सक्रिय करके इस्तेमाल में लाया जाता है। हाइब्रिड वेलनेस की एक और खासियत है, यह अमूर्त रूप से सबके लिए नहीं होता। जिस व्यक्ति की हाइब्रिड चिकित्सा हो रही होती है, उसी को ध्यान में रखकर और उसी के लिए व्यक्तिगत तरीके से जांच परखकर बनायी जाती है। इसलिए इसका प्रभाव भी निश्चित होता है और प्रभाव काफी ज्यादा होता है। इस तरह देखा जाए तो हाइब्रिड में हर्बल तो है ही, लेकिन जहां-जहां हर्बल की सीमाएं संकुचित होती हैं, वहां हर्बल में दूसरे तत्वों को सक्रिय करके इसे और प्रभावशाली जड़ी-बूटी चिकित्सा का रूप दिया जा रहा है।
बढ़ रहा है चलन
यही कारण है कि आजकल हर्बल और नेचुरल दोनो ही पारंपरिक चिकित्सा व्यवस्थाओं से आगे बढ़कर हर्बल चिकित्सा व्यवस्था कहीं ज्यादा कारगर है। क्योंकि यह न केवल नेचुरल है बल्कि सामान्य प्राकृतिक औषधियों से कहीं ज्यादा और तीव्र प्रभावशाली भी है। यही कारण है कि आज का उपभोक्ता केवल यह जानकर संतुष्ट नहीं होता कि कोई चीज नेचुरल है या नहीं। यह भी जानना चाहता है कि क्या यह सच मंे काम करती है अथवा नहीं या फिर कितने दिनों में कारगर होगी और इसके साइड इफेक्ट क्या होंगे? हाइब्रिड वेलनेस मंे इन सभी तरह के सवालों के त्वरित जवाब मौजूद हैं और ये जवाब बेहद सकारात्मक हैं। यही कारण है कि इन दिनों हाइब्रिड वेलनेस की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। क्योंकि आज की तेज रफ्तार लाइफस्टाइल मंे लोगों के पास अपनी स्किन पर ध्यान का समय नहीं है। लेकिन वो ये भी चाहते हंै कि स्किन जल्दी से जल्दी ग्लो करे, बाल झड़ना रुके पर रसायनिक तरीके से नहीं बल्कि प्राकृतिक तरीके से और तनाव भी इस पारंपरिक विधि से कम हो। इसलिए आजकल हाइब्रिड वेलनेस की मांग बाकी हर्बल उत्पादों से कहीं ज्यादा हो गई है।
लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हाइब्रिड वेलनेस के सामने हर्बल चिकित्सा खत्म हो जायेगी। हर्बल चिकित्सा अपनी जगह है और हाइब्रिड वेलनेस की अपनी जगह है। एक तरह से हाइब्रिड वेलनेस हर्बल का अपग्रेड वर्जन ही है। जिसे हाइब्रिड वेलनेस के रूप में जाना जा रहा है। जैसे लोग पहले कच्ची हल्दी खाते थे, अब वही लोग हल्दी को वैज्ञानिक रूप से बेहतर रूप में इस्तेमाल कर पा रहे हैं, तो इसके पीछे हर्बल उत्पादों को ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से प्रस्तुत करने की विधि है। हाइब्रिड वेलनेस इसके भी एक कदम आगे की बात है। इसलिए इसके ज्यादा तेज और प्रभावी परिणाम देखने को मिलते हैं। सुरक्षित और परीक्षण किया हुआ नतीजा हासिल होता है तथा यह सब कुछ जिस व्यक्ति विशेष के लिए उपचार का जरिया होता है, उसके अनुरूप विकसित किया जाता है। यही कारण है कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जीवन में ज्यादा फ्रेंडली और उपयोग मंे सरल बनाने के लिए हाइब्रिड वेलनेस का खूब इस्तेमाल हो रहा है।
लेकिन इसकी अपनी कुछ चुनौतियां भी हैं। चूंकि हाल के सालों में हाइब्रिड वेलनेस चिकित्सा व्यवस्था का खूब नाम हुआ है और हाइब्रिड उत्पादों की खूब तारीफ हुई है, जिसका नतीजा निकला है कि कई हाइब्रिड उत्पाद सिर्फ इस साख को भुना रहे हैं और ये फायदे में हर्बल से भी गये गुजरे हैं।
एक समस्या यह भी देखने को मिलती है कि ज्यादा प्रोसेसिंग के नाम पर कई बार किसी नेचुरल जड़ी-बूटी के सभी जरूरी तत्व कम हो जाते हैं या खत्म हो जाते हैं और इस मायने में यह आम लोगों के लिए घाटे का सौदा हैं, क्योंकि हर्बल उत्पादों के मुकाबले हाइब्रिड उत्पादों की कीमत कई गुना ज्यादा होती है। बहरहाल हाइब्रिड वेलनेस आज की त्वरित जरूरतों का जवाब है, विशेषकर ऐसे मरीजों की जिनके पास इंतजार करने का समय नहीं है। फिर भी इस पूरे विज्ञान मंे आयुर्वेद की गहराई तथा आधुनिक विज्ञान की सटीकता दोनो एक साथ मौजूद हैं। इसलिए ये कहीं ज्यादा कारगर है।