मणिपुर राज्य की सबसे ऊंची पहाड़ी (8500 फीट) पर स्थित उखरूल शहर के पास बसे शिरूई गांव की पहाड़ियों पर एक दुर्लभ मनमोहक परन्तु लुप्त प्रायः पौधा पाया जाता है जिसे शिरूई लिली कहते हैं। शिरूई-लिली के फूलों को 1989 में राजकीय पुष्प का दर्जा दिया गया था। इसके फूल वैसे तो मई-जून में खिलते हैं परन्तु सबसे अधिक 15 मई से 05 जून के मध्य। पहाड़ियों के किसी स्थान पर जब इसके हल्के नीले-गुलाबी फूल खिलते हैं तो लुभावना दृश्य पैदा हो जाता है।
सीमित स्थान पर पाये जाने के कारण इसका पारिस्थितिकीय (इकोलॉजिकल) महत्व है एवं इस कारण इसे स्थानिक (एंडोमिक) का दर्जा दिया गया है। इसे सिरोरा लिली तथा सिरोय-कुमुदनी भी कहते हैं तथा इसका स्थानीय नाम शिरूई काशोंग है। शिरूई लिली का वानस्पतिक नाम लिलीयम मेकलियाना है। मेकेलियाना नाम डॉ. फ्रेक किडनवार्ड की पत्नी जीन मेकेलिन के सम्मान में दिया गया है, जिसने सर्वप्रथम इस पौधे की खोज की थी। न्यूयार्क वानस्पतिक उद्यान से पौधों के संग्रह हेतु यह दम्पति 1946 में शिरूई आया था।
शिरूई लिली एक शकीय तथा कंद से पैदा होने वाला पौधा है जो छायादार स्थानों को पसंद करता है। इसकी ऊंचाई एक से तीन फीट तथा पत्तियां लम्बी व संकरी होती हैं। तने के शीर्ष पर नीले गुलाबी घंटीनुमा नीचे झुके फूल खिलते हैं। वर्ष 1950 में फूलों की रायल हार्टिकल्चरल सोसायटी ने लंदन की पुष्प प्रदर्शनी में इसे शामिल कर मेरिट-अवार्ड दिया था। भारतीय डाक विभाग ने इसका डाक टिकट भी जारी किया था। प्रकृति संरक्षण अंर्तराष्ट्रीय संघ (आय.यू.सी.एन.) ने इस पौधे की रेड-लिस्ट में शामिल कर लुप्त प्रायः पौधों की श्रेणी में रखा है।
जलवायु बदलाव, प्राकृतिक आवास में कमी तथा पौधों की अन्य आक्रामक प्रजातियों के फैलाव से इस पर संकट फैल रहा है। इसके अन्य स्थानों पर प्रत्यारोपित करने के प्रयास सफल नहीं होने पर इसे उसी स्थान पर संरक्षित कर फैलाने की कोशिश की जा रही है। डॉ. मानस साहू ने ऊतक संवर्धन (टीशू कल्चर) की सूक्ष्म प्रवर्धन विधि (माइक्रो प्रयोगशन) से 375 पौधे प्रयोगशाला में तैयार कर वर्ष 2015 में पहाड़ियों पर रोपे थे।
शिरूई लिली को मणिपुर में शांति एवं सद्भावना का प्रतीक माना जाता है एवं इसके खिलने के समय एक पांच दिवसीय उत्सव 2017 से मनाया जा रहा है। इस उत्सव में राज्य की सभी जन जातियां भाग लेती है। राज्य के पर्यटन विभाग द्वारा मनाया जाने वाला यह को बढ़ावा देने के साथ शिरूई लिली के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु आयोजित किया जाता है। वर्ष 2022 के उत्सव में दो लाख से ज्यादा मणिपुरियों ने इसमें भाग लिया था।
इस उत्सव में लाईव संगीत, लोकनृत्य, देशी खेल, स्थानीय व्यंजन, ड्रोन पो, साहसिक गतिविधियां, मिस शिरूई लिली प्रतियोगिता तथा कला व शिल्प की प्रदर्शनी शमिल रहते है। वर्ष 2022 के बाद राज्य में फैली अशांति तथा राष्ट्रपति शासन के कारण इसका आयोजन वर्ष 2023 एवं 24 में नहीं हो पाया। वर्ष 2025 में यह उत्सव राज्य में शंति तथा सद्भावना का संदेश देने तथा शिरूई लिली फूल की खोज के 75 वर्ष पूर्ण होने पर शिरूई गांव में मनाया गया।
इस वर्ष के उत्सव की थीम थी- मानवता के लिए सौदर्य (ब्यूटी फार ह्यूमनिटी)। इस उत्सव के समय राज्य शासन ने मैतेयी-समुदाय के लोगों को कुकी बाहुल्य समुदाय के क्षेत्रों से सुरक्षा देकर उत्सव में भाग लेने हेतु उखरूल पहुंचाया। दोनों समुदाय ने उत्सव को शांतिपूर्ण तरीके से मनाया। फूल के उत्सव से शांति एवं सद्भावना बढ़ाने का प्रयास सराहनीय हैं। इस वर्ष भी राज्य के मुख्यमंत्री इस महोत्सव को राज्य की जन जातियों के मध्य एकता एवं सद्भावना के प्रतीक के रूप में मनाने हेतु प्रयासरत हैं। (सप्रेस)