26 जुलाई 2026 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा स्थित सेंटर फॉर सब-ट्रॉपिकल फ्रूट्स (Centre for Sub-Tropical Fruits) में आयोजित 8वें फ्रूट एक्सपो–2026 में देशभर से आए किसानों, बागवानी विशेषज्ञों, कृषि वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों तथा फल उत्पादकों ने भाग लिया। इस भव्य आयोजन में आम की 170 से अधिक उत्कृष्ट किस्मों का प्रदर्शन आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। इसके साथ-साथ अनेक आधुनिक बागवानी तकनीकों, फल फसलों तथा नवाचारों का भी प्रदर्शन किया गया।
इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी में Nursery Online, Faridabad द्वारा मैदानी एवं अधिक तापमान वाले क्षेत्रों के लिए विकसित विशेष कम-चिल (Low Chill) सेब के पौधों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी के दौरान किसानों एवं आगंतुकों की ओर से इन पौधों को जिस प्रकार का उत्साहजनक प्रतिसाद मिला, उसने यह सिद्ध कर दिया कि हरियाणा सहित उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में सेब की खेती के प्रति किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
प्रदर्शनी में हरियाणा के विभिन्न जिलों एवं अनेक गांवों से आए किसानों ने इन विशेष सेब पौधों का गहन अध्ययन किया। बड़ी संख्या में किसानों ने प्रायोगिक खेती (Trial Plantation) के उद्देश्य से पौधे खरीदे, ताकि वे अपने खेतों में इनकी सफल खेती का अनुभव प्राप्त कर सकें। किसानों ने विशेष रूप से यह जानने में रुचि दिखाई कि कम शीतकाल (Low Chill) की आवश्यकता वाली यह विशेष किस्में हरियाणा जैसे गर्म क्षेत्रों में किस प्रकार सफलतापूर्वक फल उत्पादन कर सकती हैं।
केवल किसान ही नहीं, बल्कि विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं, कृषि महाविद्यालयों के विद्यार्थियों तथा प्रदर्शनी में आए सामान्य आगंतुकों ने भी इन पौधों के प्रति अत्यधिक उत्सुकता दिखाई। बच्चों ने पहली बार यह जानकर आश्चर्य व्यक्त किया कि अब सेब जैसे पारंपरिक पर्वतीय फल की खेती मैदानी क्षेत्रों में भी संभव हो रही है। इस प्रकार यह प्रदर्शनी कृषि शिक्षा एवं जागरूकता का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी।
लाडवा तथा आसपास के क्षेत्रों के अनेक प्रतिष्ठित नागरिकों, बागवानी प्रेमियों एवं प्रगतिशील किसानों ने भी पौधे खरीदकर भविष्य में इनके व्यावसायिक उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। कई आगंतुकों ने इन विशेष किस्मों के वैज्ञानिक पहलुओं, उत्पादन क्षमता, पौधों की देखभाल तथा आर्थिक लाभ के बारे में जानकारी प्राप्त की।
प्रदर्शनी के दौरान हरियाणा के कृषि मंत्री ने भी हमारे स्टॉल का दौरा किया। उनके साथ बागवानी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पौधों का अवलोकन किया तथा इस नवाचार के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। विभागीय अधिकारियों ने भी मैदानी क्षेत्रों के लिए विकसित इन विशेष सेब किस्मों में गहरी रुचि दिखाई।
हमारी यह भी आशा है कि हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी प्रदेश के किसानों के हित में इस पहल को प्रोत्साहित करेंगे। हमें यह बताते हुए प्रसन्नता है कि पूर्व में कई अवसरों पर कबीर कुटीर, चंडीगढ़ में माननीय मुख्यमंत्री जी से इस विषय पर विस्तृत चर्चा करने का अवसर प्राप्त हुआ। दिनांक 23 मई 2026 को माननीय मुख्यमंत्री जी ने स्वयं कबीर कुटीर परिसर में हमारे द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष सेब के पौधों का रोपण भी किया, जो हरियाणा में बागवानी के नए युग की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि जलवायु परिवर्तन और बदलती कृषि परिस्थितियों के अनुरूप किसानों को ऐसी फसलों एवं फलदार पौधों से जोड़ा जाए, जो कम संसाधनों में अधिक आय प्रदान कर सकें। मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कम-चिल सेब की किस्में भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने, बागवानी को नई दिशा देने तथा कृषि विविधीकरण को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
Nursery Online का उद्देश्य केवल पौधों का वितरण करना नहीं है, बल्कि किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी, आधुनिक बागवानी तकनीक तथा गुणवत्तापूर्ण पौधे पहुँचाकर हरियाणा सहित पूरे देश में फलोत्पादन की नई संभावनाओं का विस्तार करना है। हमें विश्वास है कि सरकार, बागवानी विभाग, कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के संयुक्त प्रयासों से आने वाले वर्षों में हरियाणा "मैदानी क्षेत्रों में सेब उत्पादन" के क्षेत्र में भी एक नई पहचान स्थापित करेगा।
The 8th Fruit Expo 2026 concluded at the Centre for Sub-Tropical Fruits in Ladwa, Kurukshetra, featuring over 170 varieties of mangoes and special events.
'यह मेला हरियाणा की कृषि शक्ति का उत्सव': हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि "यह मेला किसान की मेहनत का सम्मान है और हरियाणा की कृषि शक्ति का उत्सव है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बन रहा है. इस यात्रा की सबसे बड़ी ताकत हमारे गांव, किसान और कृषि हैं. किसान की मेहनत का पूरा मूल्य तभी मिलेगा जब वह बाजार की ताकत भी बने. इसी सोच से देशभर में फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का नेटवर्क बन रहा है।"
आम बाग लगाने पर 42 हजार रुपये प्रति एकड़ सब्सिडी: कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि भूमि जोत छोटी होती जा रही है, इसलिए सरकार किसानों को बागवानी फसले लगाने के लिए प्रेरित कर रही है. नया आम बाग लगाने पर 42 हजार रुपये प्रति एकड़ सब्सिडी दी जाती है. साथ ही आम की फसल को भावांतर भरपाई योजना में भी शामिल किया गया है।
2 किलो तक का होता है 'मोदी आम': प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रायपुर गांव से पहुंचे आम उत्पादक उस्मान ने बताया कि वे हर वर्ष देश के अलग-अलग राज्यों में आयोजित होने वाली बागवानी प्रदर्शनियों में भाग लेते हैं. उन्होंने बताया कि 30 एकड़ में 350 वैरायटी के आमों का बागान है. प्रदर्शनी में 170 वैरायटी के आमों को लेकर आया हूं. हाल में यूपी में तैयार मोदी आम लेकर आया हूं, जिसके एक आम का वजन 1 से 2 किलो तक का होता है. मेरा उद्देश्य किसानों और आम लोगों को विभिन्न किस्मों के आम और उनकी आधुनिक खेती की जानकारी देना है, ताकि किसान नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन कर सकें।
आम की खेती से जुड़ी कई जानकारी मिलीः उस्मान ने बताया कि उनके पास अमरपाली, मलिका, गुलाब खास, सोन चितला और मोदी मैंगो जैसी कई विशेष किस्में मौजूद हैं. प्रदर्शनी में आने वाले किसान, महिलाएं और विशेष रूप से स्कूली बच्चे इन किस्मों को देखकर काफी उत्साहित नजर आए. बच्चे उनसे पौधों की उपलब्धता, फल आने का समय और आम की खेती से जुड़ी कई जानकारियां भी लेते रहे. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन किसानों और बागवानों को एक-दूसरे से जोड़ने का बेहतरीन मंच हैं. यहां नई तकनीकों, उन्नत किस्मों और बागवानी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की जाती हैं, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलता है और उन्हें आधुनिक खेती अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
1200 रुपये प्रति दर्जन तक विदेशों में निर्यात होती है आम:उस्मान ने बताया कि "उनके बाग के आम केवल देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक निर्यात किए जाते हैं. चौसा जैसी किस्मों की विदेशों में अच्छी मांग है, जबकि कुछ किस्मों का उपयोग बड़ी जूस बनाने वाली कंपनियां भी करती हैं." उन्होंने बताया कि कुछ प्रीमियम किस्मों की कीमत ₹400 प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जबकि कुछ विशेष किस्में `1200 प्रति दर्जन तक विदेशों में निर्यात होती हैं।