हाल के सालों में भारत में अगर वाकई कोई हर्बल सुपर फूड के रूप में उभरा है, तो वह है चिया सीड्स। विशेषकर जिम करने वाले युवाओं के बीच चिया सीड्स को किसी सुपर फूड से कम करके नहीं आंका जाता। चिया सीड्स, भारतीय हर्बल नहीं है, इसका मूल घर मैक्सिको, ग्वाटेमाला और पेरू में है यानी यह प्राचीन एज्टेक और माया सभ्यता का सुपर हर्बल फूड है। वास्तव में चिया शब्द भी मायान भाषा का ही शब्द है, जिसका मतलब होता है- शक्ति। चिया का पौधा यानी साल्विया हिस्पैनिका वास्तव में पुदीना परिवार का ही पौधा है। इसे सुपर फूड इसलिए माना जाता है, क्योंकि 100 ग्राम चिया सीड्स में लगभग 17 ग्राम ओमेगा-3 फैटी एसिड, 16 ग्राम प्रोटीन, 34 ग्राम फाइबर, दूध से पांच गुना ज्यादा कैल्शियम तथा स्किन और हेल्थ के लिए बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषण तत्व पाये जाते हैं। चिया सीड्स वजन घटाने में मददगार है, क्योंकि यह फाइबर और पानी सोखकर पेट के भरे होने का एहसास दिलाता है। इससे डायबिटीज नियंत्रण में रहती है। हृदय और दिमाग की सेहत बेहतर होती है। हड्डियां मजबूत होती हैं और स्किन में ग्लो आता है। इसलिए इसे आज भारतीय युवाओं के बीच सुपर फूड का दर्जा हासिल है।
भारत में चिया सीड्स की लोकप्रियता खास तौरपर 2015 के बाद तब बढ़ी है, जब ग्लोबल हेल्थ मार्केट में चिया सीड्स को सुपर फूड का दर्जा मिला है। तभी भारत में भी इसका ट्रेंड शुरु हुआ। खासकर अर्बन हेल्थ कॉन्शियस युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और आमतौर पर जिम जाने वाले और डाइटिंग करने वाले युवाओं की यह हर्बल फूड पहली पसंद बन गया। इसकी लोकप्रियता बढ़ाने में सोशल मीडिया की भी अहम भूमिका है। इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब में शॉर्ट्स वीडियोज ने इसकी लोकप्रियता को बहुत तेजी से बढ़ाया है। यही कारण है कि चिया सीड्स पिछले दस सालों में सिर्फ जिम लवर, मेट्रोइस युवाओं की ही खास पसंद नहीं है बल्कि अब तो यह छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले मध्यवर्गीय घरों तक भी पहुंच गया है। चिया सीड्स की भारी मांग और लोकप्रियता को देखते हुए भारत के कई प्रांतों में हर्बल खेती करने वाले किसान, अब भारत में ही चिया सीड्स की खेती करने लगे हैं। तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में अब इसकी अच्छी खासी खेती होने लगी है। क्योंकि इसके लिए अच्छी जलनिकासी वाली बलुई और दोमट मिट्टी की जरूरत होती है तथा जमीन का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होने की जरूरत होती है। चिया सीड्स बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर भी अच्छा उत्पादन दे देता है। जहां तक चिया सीड्स की खेती के लिए मौसम और जलवायु की जरूरतों की बात है, तो यह उष्णकटिबंधीय व उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में उपज के लिए सबसे उपयुक्त होता है। तापमान 20 डिग्री सेंटीग्रेड से 30 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच आदर्श होता है।
बहुत ठंडी या बहुत गर्म जगह पर इसका उत्पादन घट जाता है। क्योंकि भारत में इन दिनों चिया सीड्स का सालाना बाजार 1000 करोड़ रुपये से ऊपर का हो चुका है और अगले पांच सालों तक इसके सालाना 15 से 20 फीसदी दर से बढ़ने की संभावना है। इसलिए अब भारत की आयुर्वेद और वेलनेस इंडस्ट्री चिया सीड को स्वदेशी सुपर फूड की तरह प्रमोट करने लगे हैं। इसलिए जो लोग पहले सिर्फ विदेशी ब्रांड खरीदते थे, अब स्थानीय किसान और कंपनियों के उत्पाद भी सहजता से खरीद रहे हैं। वास्तव में चिया सीड्स आज सिर्फ हर्बल ट्रेंडभर नहीं बल्कि भारत के हर्बल किसानों के लिए एक उभरता हुआ संभावनाओं से भरा कृषि बिजनेस है।
चिया सीड्स की बुआई के लिए एक एकड़ में डेढ़ से दो किलो बीजों से काम चल जाता है और जहां तक उपज का सवाल है तो वह 400 से 500 किलो प्रति एकड़ आसानी से हो जाती है। अगर अतिरिक्त देखरेख की गई तो एक एकड़ का उत्पादन 600 किलो तक भी पहुंच जाता है। आमतौर पर चिया सीड्स बाजार में 400 से 600 रुपये किलो बिक जाते हैं। लेकिन ग्राहकों को ये काफी महंगे, आमतौर पर 700 से 1000 रुपये किलो तक मिलते हैं।
इस तरह अगर किसानों को होने वाले लाभ का आंकलन करें तो उन्हें एक एकड़ में 1.5 से 2 लाख रुपये का मुनाफा हो जाता है। क्योंकि चिया सीड्स की फसल 100 से 120 दिनों की है। इस लिहाज से यह काफी फायदेमंद फसल है। इसकी कटाई भी हाथ से या छोटे हार्वेस्टर से आसानी से हो जाती है और किसानों द्वारा तैयार फसल बहुत आसानी से अमेजन, फ्लिपकार्ट और बिग बॉस्केट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा हो जाती है। अगर आपने ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन हासिल कर लिया तो आपका उत्पाद अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों में भी निर्यात हो सकता है। क्योंकि इन देशों में चिया सीड्स की खासी मांग है। हालांकि अब तक का अनुभव यही है कि स्थानीय स्तर पर ही जिम, हेल्थ कैफे, स्मूदी बार और न्यूट्रिशन स्टोर में सप्लायी करके ही अपनी फसल आसानी से बेची जा सकती है। क्योंकि चिया सीड्स की खेती में कम पानी, कम खाद और कम मेहनत लगती है, इसलिए किसानों को यह फसल गेहूं, धान और दलहन जैसी पारंपरिक खेती से ज्यादा मुनाफा देती है। साथ ही यह बात भी है कि अगले पांच से दस सालों तक इसका मार्केट लगातार बढ़ना है और बढ़कर कई गुना हो जाना है। इसलिए चिया सीड्स की खेती हर हाल में किसानों के लिए फायदेमंद है।