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सिर्फ खेती के कंधों पर नहीं उठेगा किसानों की ­खुशहाली का भार

सिर्फ खेती के कंधों पर नहीं उठेगा किसानों की ­खुशहाली का भार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 में जब सत्ता में आये थे, तब से लगातार किसानों की आय बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं। ऐसा नहीं है कि पिछले 11 सालों में किसानों की आर्थिक स्थिति जरा भी बेहतर नहीं हुई, हुई है लेकिन उन दावों के आसपास भी नहीं हुई, जिनका वादा किया जाता रहा है। लेकिन इसकी यह वजह नहीं है कि सरकार इसकी कोशिश नहीं कर रही बल्कि वजह यह है कि गहराई से सोचकर देखें तो देश के सबसे बड़े समुदाय किसानों की आर्थिक स्थिति सिर्फ खेती से नहीं सुधर सकती। कहने का मतलब यह है कि सिर्फ खेती किसानों को खुशहाल बनाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर नहीं उठा सकती। इसलिए मोदी सरकार को अपने इस तीसरे कार्यकाल में शिद्दत से सोचना होगा कि किसानों की बेहतरी के लिए खेती को और किन किन चीजों का सहारा दिया जा सकता है, जिससे किये वायदे के मुताबिक किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके। क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार लगातार किसानों की आय दोगुनी करने के अपने लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। 
‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’, ’मृदा स्वास्थ्य कार्ड’, ‘ई-नाम मंडी’, ‘फसल बीमा योजना’ और ‘कृषि अवसंरचना कोष’ जैसी नीतियों को लागू किये जाने के बावजूद किसानों की पारंपरिक आर्थिक स्थिति में थोड़ा बहुत तो सुधार हुआ है, लेकिन उतना नहीं हुआ, जितनी की उम्मीद थी या कि जितना दावा किया गया था। शायद इसकी वजह यही है कि सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर किसानों की खुशहाली का सपना नहीं देखा जा सकता। 


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