ग्रामीण पशुपालन में प्रायः गाय और भैंस को अधिक महत्व दिया गया है, पर अनेक निर्धन परिवारों से पूछने पर पता चलेगा कि उनके लिए बकरी-पालन का महत्व इससे कम नहीं है, शायद अधिक ही हो। अधिकांश निर्धन परिवारों के पास गाय और भैंस की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि कुछ बकरियां होने की संभावना कहीं अधिक है। यदि कम समृद्ध ग्रामीण परिवारों की दृष्टि से देखें तो बकरी पालन पशुपालन का अधिक महत्वपूर्ण पक्ष माना जा सकता है।
बकरी पालन के इस महत्व को समझते हुए ‘सृजन’ संस्था ने ग्रामीण आजीविका सुधारने के अपने प्रयासों में इसे समुचित महत्व दिया है व अनेक स्तरों पर बकरी-पालन आधारित आजीविका को सुधारने का प्रयास अपने अनेक कार्यक्षेत्रों में किया है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में ‘सृजन’ के कार्यकर्ताओं ने बकरी-पालन संबंधी अपने पांच प्रयासों के बारे में बताया। पहला प्रयास तो यह है कि बकरियों के रहने के स्थान को अधिक स्वच्छ व सुरक्षित बनाया जाए। विशेषकर मेमनों के लिए अधिक सुरक्षित, अलग स्थान की व्यवस्था करने का प्रयास किया गया।
दूसरा प्रयास यह हुआ कि बकरियों के लिए बेहतर चारे की व्यवस्था की गई। उनके लिए अधिक पौष्टिक आहार तैयार किया गया। साथ में सामान्य पत्ते के चारे से भी धूल हटाकर, अधिक स्वच्छ रूप से खिलाने पर ध्यान दिया गया। आसपास के स्थानों में जहां बेहतर नस्ल की बकरी मिली वह उपलब्ध करवाई गई। बिक्री के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाए गए। अंत में सबसे महत्वपूर्ण प्रयास बकरियों की बीमारी के इलाज के लिए गांव के भीतर ही सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया।
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